~~Prayers~~

It’s a daily routine of most of us … We do pray God daily before we start our day … The Good Morning …Join  hands ,close eyes , bow our head ..  but most of us forget that … He is the almighty.. whom we are praying and wishing for something … We all pray but , ask yourself for once…”Do I really pray with  heart”? ,”Is that a Prayer”?..and now tell me what’s the answer that you get from your heart? Most of you must be getting my point… coz you all know that we repeat same thing everyday… and you all must be getting the word NO as your answer…. Right?

 

Prayer is that holy and pure thing that lets you forget your real world.. you just remember your God.. and your love towards him… Being in Love with God is called Prayer…Just think  a condition when one of your closest friend meets you after a long time and you are very happy to meet him/her but he/she is too busy to listen you. You will surely feel very bad and it depends on your nature ,what reaction you are going to show.

 

Now  tell me Do you think that this Almighty is so unknown to your  feelings and thoughts that you can make him fool so easily … you  ask him a long list of your wishes and start thinking  that when is he going to fulfill them  , even when your mind is not at all praying completely.. Its just like a Bad network in a Mobile connection … How will he listen us until the network is not clear ? So , who is responsible for a clear network connection? You know the answer …..We are responsible !!

 

Real prayer is that when your emotions are so overwhelmed  that you don’t have anything to speak out ,just a feeling of completeness ,a feeling of crystal purity.. When your believes on God are so very strong … you will not have to ask him even for once … and your each and every wish will start getting complete from the same moment…

 

So I wish Today onward You will Pray for sure ….

 

Keep Praying & Keep Living ..

 

Rest is seen by The Almighty!!

ये एहसास कैसा है?

ये एहसास कैसा है….
क्यूँ है ये मेरा इतना अपना कभी ,
तो कभी ये ही सबसे पराया लगता है …
कभी दुनिया जीतने का एहसास हुआ मुझको …
तो कभी सब कुछ खोया सा लगता है !!

हर पल मरती हूँ दिल ही दिल में
फिर हर पल खुद को जिंदा करती हूँ …

तुम नहीं होते तो सब सूना लगता है …
आते ही तुम्हारे सब आसां लगता है …

दिन जो बीता बुझे दिए सा ..
छूने से तुम्हारे रौशन फिर लगता है …

ये रौशन दिया अब कभी न बुझने दूंगी …
तुम्हे किसी बहुत महफूज़ जगह रख लूंगी |

जाने कब ये कह पाउंगी तुमसे मैं ..
जाने कब आएगा वो मुस्कुराता पल ..
दिल ने तो हर वक़्त कहा है तुम्हारे दिल से ..
जाने कब ये जुबां भी बोल पाएगी !!

क्या कहूँ?

तुम कहते हो ,मैं कुछ कहती नहीं ….
कैसे कहूँ की अब जो हाल है
हर घडी तुम्हारा अफसाना ..
हर पल तुम्हारा ख्याल है …

सपनो में है  तुम्हारी झलक
जागते ही फिर दुआ तुम्हारी 
जितने पल हैं उतनी यादें …
तुम्हारी ,तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी..

खोयी सी रहती हूँ बातों में 
जब जब भी तुमसे मिलती हूँ …
और जब रुक कर तुम कुछ पूछते हो
मैं ,निशब्द बन छुप जाती हूँ ..

कहीं जान न लो सारे राज़ तुम ..
कहीं कुछ गलत न कह बैठूं मैं ..
डरती हूँ खोने से अब तुम्हे
क्या कहूं पर मानो ,सच है यही …

सोचती हूँ कभी-
“ये कहूँ ,वो बताऊँ ”
फिर तुम्हारे आते ही !
मैं खुद को भूल जाती हूँ
जाने ऐसा क्यूँ होता है ?
मैं तुम में ही खो जाती हूँ |

तुम्ही बताओ क्या कहूँ मैं अब ?
तुम्हारी ही बातों के सिवा ..
मेरी दुनिया तो जैसे बस
तुम्हारे ही आस पास है !!

इंतज़ार

शाम आ गयी अपने वक़्त से
पर तुम नहीं आये?
बीतने लगी है शाम फिर वक़्त से
तुम अब भी नहीं आये ?
रात ने भी ,अब तो, दस्तक दे दी है
तुम क्यूँ नहीं आये !!

देखो ना, आज नींद ने भी तुमसे दोस्ती की है शायद
कुछ जुदा सी है मुझसे आज वो भी !!
कोई नहीं है पास मेरे तुम्हारे ख्यालों के सिवा
मैं खुश भी हूँ और तन्हा भी ….
पूछ रही है हर पहर मुझसे तुम्हारा ही फ़साना
ये राहें भी जाने क्यूँ गुमसुम सी लगती है

सर उठा के चाँद से तुम्हारा हाल लिया ..
हवाओं को फिर रोक के अपने दिल का संदेस दिया…
जब कोई झोंका आये पास तुम्हारे …
मेरे खामोश दिल की आवाज़ सुन लेना …

एक बात सुनो, तो कुछ मांगू तुमसे !
थोडी सी नींद और कुछ पल तुम्हारे ही…
वक़्त मिले तो ख़्वाबों में ही मिल जाना
दो बातें तुमसे फिर वहीं मैं कर लूंगी…

~music~

चाँद मुस्कुराया

एक शाम जब खामोशी ने घेरा
दिल में दबे कुछ लव्जों को सुना ..
हवा धीमी पड चुकी थी…
अँधेरा भी गहराने लगा

घर की छत पर बैठी मैं ..
चाँद को निहारने लगी…
वो चाँद जो हमेशा मेरे पास था
खुशियों में, गम में….
आज भी मेरे साथ था
पर जाने आज क्या खास था ?

चांदनी कुछ नयी सी लगी….
ज्यादा रोशन,ज्यादा चमकती
ज्यादा अपनी सी लगी ….
आसमां भी झिलमिला रहा था … 
जाने क्या गुनगुना रहा था ,

कही ये फ़साना वही तो नहीं ?
जिसे सुनना चाहा हमेशा…
जिसे जीना चाहा हमेशा …
मुस्कुरारा रहा था चाँद ..
और हवा भी फिर बहने लगी….

खुद को पहचान

नारी कितने रूप तेरे !
एक अस्तित्व है, एक जान है ;
एक आत्मा है, पहचान है;
एक  ज्वाला है , एक अग्नि है ,
तू अब खुद को पहचान ले |

क्यों  है यहाँ बेबस पड़ी ?
उठ बेडियों को तोड़ दे ;
नज़रें मिला इस दुनिया से ;
खुल के ज़रा तू सांस ले |

है जननी तू ,तू पूज्य है ;
है सबला तू ,फिर क्यों डरे?
संहार कर इस चुप्पी का ;
हर बाधा को आवाज़ दे …

तू निडर हो बस आगे बढ़ ;
काटों को अब तू पार कर ;
लहू में रंगे इन पैरों से
तू  दौड़ चल अपनी डगर |

तेरे कदमो के निशां से ही
नए रास्ते फिर बनेंगे …
फिर इन अपाहिज बंधनों को
तोड़ कोई बाहर आएगा …

मेरी भी उमर लग जाये उन्हें

साँसे ली जिनकी वजह से  …
जिन हाथों ने सहारा दिया,
दिल में जिनकी सबसे खास-अनोखी जगह है,
जिन्होंने ने मेरे जीवन को आधार दिया|

हर मुशकिल राह को जिसने आसां किया ,
जो भी माँगा, सब पल में हाजिर किया|

खुश रहें सदा वो दिल से !!
कोई गम ना हो, बस ये सौगात मांगती हूँ |

ए खुदा मेरी भी उमर लग जाये उन्हें
हर वक़्त हर घडी ,आपसे उनका साथ मांगती हूँ |

दिल दुखाया है मैंने , कई बार..
जानती  हूँ… और सजा भी खुद आज मांगती हूँ …

मेरे माँ-पापा सा  ना दूजा कोई मेरे लिए
हर जनम ,अपने सिर उनका हाथ मांगती हूँ |

दिल ने कहा

[1]वक़्त रुकता नहीं  …..
ये  तो  अपनी  धुन  में  रहता  है
पर  इस  नादाँ  दिल  की  क्या  कहें
बस  जिद करना जानता है …..

[2]दिल  की  आवाज़  सुनने  की  कोशिश  थी
पर  खामोशी  की  एक  दीवार  मिली
जब  खामोशी  से  दोस्ती  हुई
वक़्त  की  तलवार  थी !!

[3]सवाल  तो  है  कई
पर  जवाब  तो  मिले ..
उन  सवालो  को  पूछूं  भी
पर  इतने  अल्फाज़  तो  मिले
….

 [4]सपनो  की  दुनिया  ही  अजीब  है
कभी  हँसाती तो  कभी  रुलाती  है …
कुछ  जो  पूरे  होते  है
नयी  आशाएं  जगह  जाते  है ..
और  कुछ  अधूरे  बन
दिल  में  समा  जाते  हैं ….

[5]दिल  का  रिश्ता  कैसा  होता  है  ??
चंचल मन  जैसा
या भोली आँखों जैसा !
नहीं जानती इन सवालों  के  जवाब
पर  हाँ  ये  जानती  हूँ ,
दिल  का  रिश्ता  ऐसा  ही  होता  है
जैसा  हमारा  रिश्ता  है !!

[6]खामोशी  से  ये  कैसा  नाता  है  मेरा
अक्सर  दिल  ये  पूछता  है
क्यों  खामोश  रह  कर  भी  दिल  ये
हजारों  सवाल  कर  बैठता  है |

[7]तुम्हारी  निगाहें  जिसे  ढूंढे
वो  हासिल  हो  तुम्हे
बस  खुदा  से  यही  गुजारिश  है
कोई  गम   ना  हो  तुम्हे !!
ज़िन्दगी  की  हर  ख़ुशी  कदमो  में  हो  तुम्हारी
ए  मेरे  दोस्त  बस  ज़रा  याद  रखना  हमे !!

नाज़

हे वस्त्र ! तुम्हे हो नाज़ की तुम जा लगे
                              जवानों के तन पर |
हे शस्त्र ! तुम्हे हो नाज़ की तुम जा लड़े
                                 देश की रक्षा कर |
हे पुष्प !तुम्हें हो नाज़ की तुम जा चढ़े
                               शहीदों के शव पर |
हे वीर !तुम्हें हो नाज़ की तुम ढह गए
                                 कर्म की पूजा कर |

ऐसे सपूत ऐसे रक्षक नहीं जन्मे है किसी देश में ,

हिन्दू हो या मुस्लिम रहते है सब एक ही परिवेश में ;

है नमन ऐसी माताओं को जिसने है इनको जन्म दिया

और गर्व है उनके पुत्रों पर जिसने देश हित कर्म किया !!

Note: I wrote this poem in 1999 when I was in 9th std …. This is my first creation !! I wrote it for 15th august function at school . Hope you all will like it and if any mistakes are there then please let me know!!

शुक्रिया ए ज़िन्दगी!!

जाने कहाँ से ,
यूहीं बिन बात, 
कोई ख्याल आ रहा है|

खिड़कियों से बहती ठंडी भीनी हवा के साथ
कोई पैगाम आ रहा है |

एक आहट सी हुयी जो 
तो दिल चौक गया,
हँसते हुए मन फिर खुद को सम्भाल रहा है |

खोयी सी आँखें ढूँढती फिरती है जाने क्या?
इस सवाल सा ना कोई सवाल रहा है …

उस ऊपर वाले का ही है ये करम,
कुछ ना होने पर भी सब होने का एहसास हो रहा है |

खुशियों की जैसे बारिश हो रही हो मेरे आँगन
सोंधी सी खुशबु से दिल का हर कोना बाग़ हो रहा है |

ज़िन्दगी तू जो दोस्त बन गयी है मेरी,
ऐसा अनोखा तो ना कोई दूजा साथ रहा है |