ए ज़िन्दगी मेरी..
तू किस डगर को चली,
साथ ले मुझे भी ज़रा…
मुझे भी दिखा
तेरे हैं जो नए से रास्ते ..
जिन्हें है जीना मुझे अभी …

क्यूँ इस रास्ते पर खड़े सभी
मुझसे इतने बेगाने लगते हैं ?
मैं जानती हूँ उन्हें ,
पर वो तो मुझसे अनजाने लगते हैं |

ज़िन्दगी तुझे इतना था चाहा मैंने..
इतने प्यार से तुझे संभाला है ..
क्या गिला हुआ मुझसे जो
तू भी आज मुझसे ही खफा है ?