angel-of-peaceये एहसास कैसा है….
क्यूँ है ये मेरा इतना अपना कभी ,
तो कभी ये ही सबसे पराया लगता है …
कभी दुनिया जीतने का एहसास हुआ मुझको …
तो कभी सब कुछ खोया सा लगता है !!

हर पल मरती हूँ दिल ही दिल में
फिर हर पल खुद को जिंदा करती हूँ …

तुम नहीं होते तो सब सूना लगता है …
आते ही तुम्हारे सब आसां लगता है …

दिन जो बीता बुझे दिए सा ..
छूने से तुम्हारे रौशन फिर लगता है …

ये रौशन दिया अब कभी न बुझने दूंगी …
तुम्हे किसी बहुत महफूज़ जगह रख लूंगी |

जाने कब ये कह पाउंगी तुमसे मैं ..
जाने कब आएगा वो मुस्कुराता पल ..
दिल ने तो हर वक़्त कहा है तुम्हारे दिल से ..
जाने कब ये जुबां भी बोल पाएगी !!