तुम कहते हो ,मैं कुछ कहती नहीं ….
कैसे कहूँ की अब जो हाल है
हर घडी तुम्हारा अफसाना ..
हर पल तुम्हारा ख्याल है …

सपनो में है  तुम्हारी झलक
जागते ही फिर दुआ तुम्हारी 
जितने पल हैं उतनी यादें …
तुम्हारी ,तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी..

खोयी सी रहती हूँ बातों में 
जब जब भी तुमसे मिलती हूँ …
और जब रुक कर तुम कुछ पूछते हो
मैं ,निशब्द बन छुप जाती हूँ ..

कहीं जान न लो सारे राज़ तुम ..
कहीं कुछ गलत न कह बैठूं मैं ..
डरती हूँ खोने से अब तुम्हे
क्या कहूं पर मानो ,सच है यही …

सोचती हूँ कभी-
“ये कहूँ ,वो बताऊँ ”
फिर तुम्हारे आते ही !
मैं खुद को भूल जाती हूँ
जाने ऐसा क्यूँ होता है ?
मैं तुम में ही खो जाती हूँ |

तुम्ही बताओ क्या कहूँ मैं अब ?
तुम्हारी ही बातों के सिवा ..
मेरी दुनिया तो जैसे बस
तुम्हारे ही आस पास है !!