Moonशाम आ गयी अपने वक़्त से
पर तुम नहीं आये?
बीतने लगी है शाम फिर वक़्त से
तुम अब भी नहीं आये ?
रात ने भी ,अब तो, दस्तक दे दी है
तुम क्यूँ नहीं आये !!

देखो ना, आज नींद ने भी तुमसे दोस्ती की है शायद
कुछ जुदा सी है मुझसे आज वो भी !!
कोई नहीं है पास मेरे तुम्हारे ख्यालों के सिवा
मैं खुश भी हूँ और तन्हा भी ….
पूछ रही है हर पहर मुझसे तुम्हारा ही फ़साना
ये राहें भी जाने क्यूँ गुमसुम सी लगती है

सर उठा के चाँद से तुम्हारा हाल लिया ..
हवाओं को फिर रोक के अपने दिल का संदेस दिया…
जब कोई झोंका आये पास तुम्हारे …
मेरे खामोश दिल की आवाज़ सुन लेना …

एक बात सुनो, तो कुछ मांगू तुमसे !
थोडी सी नींद और कुछ पल तुम्हारे ही…
वक़्त मिले तो ख़्वाबों में ही मिल जाना
दो बातें तुमसे फिर वहीं मैं कर लूंगी…

~music~