दिल ने कहा
April 4, 2008 — Tanu Shree[1]वक़्त रुकता नहीं …..
ये तो अपनी धुन में रहता है
पर इस नादाँ दिल की क्या कहें
बस जिद करना जानता है …..
[2]दिल की आवाज़ सुनने की कोशिश थी
पर खामोशी की एक दीवार मिली
जब खामोशी से दोस्ती हुई
वक़्त की तलवार थी !!
[3]सवाल तो है कई
पर जवाब तो मिले ..
उन सवालो को पूछूं भी
पर इतने अल्फाज़ तो मिले ….
[4]सपनो की दुनिया ही अजीब है
कभी हँसाती तो कभी रुलाती है …
कुछ जो पूरे होते है
नयी आशाएं जगह जाते है ..
और कुछ अधूरे बन
दिल में समा जाते हैं ….
[5]दिल का रिश्ता कैसा होता है ??
चंचल मन जैसा
या भोली आँखों जैसा !
नहीं जानती इन सवालों के जवाब
पर हाँ ये जानती हूँ ,
दिल का रिश्ता ऐसा ही होता है
जैसा हमारा रिश्ता है !!
[6]खामोशी से ये कैसा नाता है मेरा
अक्सर दिल ये पूछता है
क्यों खामोश रह कर भी दिल ये
हजारों सवाल कर बैठता है |
[7]तुम्हारी निगाहें जिसे ढूंढे
वो हासिल हो तुम्हे
बस खुदा से यही गुजारिश है
कोई गम ना हो तुम्हे !!
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी कदमो में हो तुम्हारी
ए मेरे दोस्त बस ज़रा याद रखना हमे !!
April 4, 2008 at 11:03 am
[7]खामोशी से ये कैसा नाता है मेरा
अक्सर दिल ये पूछता है
क्यों खामोश रह कर भी दिल ये
हजारों सवाल कर बैठता है |
excellent
April 4, 2008 at 12:41 pm
3]सवाल तो है कई
पर जवाब तो मिले ..
उन सवालो को पूछूं भी
पर इतने अल्फाज़ तो मिले ….
Bhaut khoob….i liked it very very much.
April 4, 2008 at 2:02 pm
3]सवाल तो है कई
पर जवाब तो मिले ..
उन सवालो को पूछूं भी
पर इतने अल्फाज़ तो मिले ….
kya baat hai , bahut khub
April 4, 2008 at 2:48 pm
दिल का रिश्ता कैसा होता है ??
चंचल मन जैसा
या भोली आँखों जैसा !
नहीं जानती इन सवालों के जवाब
पर हाँ ये जानती हूँ ,
दिल का रिश्ता ऐसा ही होता है
जैसा हमारा रिश्ता है !!
all are really very nice….but this one i liked most…
ansh would be very happy if he could read this…
April 4, 2008 at 10:08 pm
Dear Rachna Ji
Thanks a lot aap yaaha aayi n commented on my work… Do keep guiding me
Regards!!
April 4, 2008 at 10:10 pm
@shubhashish ,U r welcome here..n Thanks For visiting … Keep visiting n sharing ur comments
April 4, 2008 at 10:14 pm
Dear Rewa di n Shivshankar .
Thanks for liking my lil creations….
Shukriyaa doston ….
Keep on showering ur comments here…
Regards!!
April 5, 2008 at 12:46 pm
उनकी खामोशियों को
जानना भी चाहा ,समझना भी .
मासूम इस दिल ने रुक कर
इंतज़ार भी किया उनका
पर खामोश रह कर भी मेरे इस दिल से
कुछ कह ना पाए वो bahut hi sahi bahut badhiya
April 7, 2008 at 3:10 pm
तुम्हारी निगाहें जिसे ढूंढे
वो हासिल हो तुम्हे
बस खुदा से यही गुजारिश है
कोई गम ना हो तुम्हे !!
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी कदमो में हो तुम्हारी
ए मेरे दोस्त बस ज़रा याद रखना हमे !!
gr8….
zindagi rahi to aise dost se to zarur milna chahenge ae dost…..
regds
Jitender Singh
April 9, 2008 at 3:40 pm
Hello….betu kahan ho? missing you
April 11, 2008 at 4:45 am
hi
where u went yer….no posting for quite so long…
and no reply also..
regards
shivshankar
April 16, 2008 at 8:12 am
Hello, I m back now….
April 16, 2008 at 8:55 pm
welcome back
April 18, 2008 at 8:58 am
Aankh hai bhari bhari aur tum dil lagane ki baat karte ho…….
April 18, 2008 at 2:43 pm
kya hua di …ye senti baatein kyu???
aankhon ki boodein ye tumhari
kahi kisi ki neend na uda de
bas zara sa muskura do
shayad kisi dil ko rahat mile!!
lots of luv!!
April 18, 2008 at 3:39 pm
hehehehe…..thoda senti wala mahoul bana rahi thee……