नाज़
March 30, 2008 — Tanu Shreeहे वस्त्र ! तुम्हे हो नाज़ की तुम जा लगे
जवानों के तन पर |
हे शस्त्र ! तुम्हे हो नाज़ की तुम जा लड़े
देश की रक्षा कर |
हे पुष्प !तुम्हें हो नाज़ की तुम जा चढ़े
शहीदों के शव पर |
हे वीर !तुम्हें हो नाज़ की तुम ढह गए
कर्म की पूजा कर |
ऐसे सपूत ऐसे रक्षक नहीं जन्मे है किसी देश में ,
हिन्दू हो या मुस्लिम रहते है सब एक ही परिवेश में ;
है नमन ऐसी माताओं को जिसने है इनको जन्म दिया
और गर्व है उनके पुत्रों पर जिसने देश हित कर्म किया !!
Note: I wrote this poem in 1999 when I was in 9th std …. This is my first creation !! I wrote it for 15th august function at school . Hope you all will like it and if any mistakes are there then please let me know!!



