मंजिल की ओर

बंद आँखों से खुले आसमाँ को देखा तो
उस आसमाँ में पंछी नहीं कुछ सपने दिखे 
और साथ में थे कुछ अरमानो के बादल,
एक सपना कुछ अपना सा लगा
तो दिल किया आज ही जी लूँ उसे,
कल का तो पता नहीं , कल को किसने देखा है
जी भर कर बस आज ही जी लेती हूँ |
जीने की चाह दिल में लिए फिर
चल पड़ी मंजिल की डगर पर
पूरा करना है वो सपना
और बस ‘आज’ ही तो बाकी है |

प्यार तो बस प्यार है

कई जगह , कई बार , कई तरह से
सुना है ,देखा है और महसूस िकया है
बदनाम होते हुए इस लफ्ज को ;

कुछ दुखते हुए िदलों ने ,
कुछ टूटे हुए सपनों ने ,
इसे एक नया ही रूप दे डाला है |

प्यार कोई शब्द ,कोई आवाज़ नहीं
ये तो एक खामोशी भरा एहसास है |

प्यार कभी मरता ,कभी ख़त्म नहीं होता ,
ये तो हर कण,हर मन में रचता बसता
हर रिश्ते की वजह, हर सांस का आधार है |

लोग इसे कुछ भी कहे या कोई भी नाम दे डाले
प्यार तो बस प्यार है और ये भी सच है…
जैसा भी हो…जहाँ भी हो …
प्यार तो बस प्यार ही फैलाएगा |

मैं खुश हूँ

मेरी  ज़िन्दगी का ढलता  ये सूरज,
सवेरा  कहीं लाता होगा |
मेरा मन  उदास है   तो क्या,
कहीं कोई मुस्कुराता  होगा|

कभी मांगी  थी एक दुआ  दिल ने ,
जो अब पूरी   होती लगती  है|
मेरे हिस्से की खुशियों  को,
रब   वहाँ पहुचाता  होगा|

ये असर  मेरी दुआओं  का
कभी  कम ना  होने  देना |
हस्ती  हुई   उन आखों  को,
कभी नम  ना  होने  देना|

ज़िन्दगी  भर की मेरी ख़ुशी
गम में बदल जाये तो क्या?
एक नया सूरज हर पल यूहीं
बस वहाँ उगाते  रहना !

धुंधली यादें

एक शाम खामोश सी,
एक लम्हा भारी सा|
हाथों मे एक  कलम  और िदल  में  कुछ  बातें,
बातें  कुछ कड़वी,  कुछ मीठी ,
कुछ भूली , कुछ बिसरी,
कुछ जानी, कुछ  अनजानी,
कुछ  कही ,कुछ अनकही|
आखों के  सामने  से गुज़रते  कुछ  पल ;
जी  करता  है  उन  पलों  को  फिर जीने  का  फिर उनमे  खोने  का,
पर सच तो सच ही  है  ना ;
बीती बातें और बीता वक़्त  कभी  नहीं  आता ,
बस   छोड़  जाता  है  कुछ  यादें,  कुछ  सूनी  सी  यादें ;
जो  दिल में  उठती  हैं  और  खामोश हो जाती  हैं |
जानती  हूँ  ज़िन्दगी चलती  रहती   है ,
और यादें भी धुंधली हो  जातीं हैं ,
वो  पल भी आएगा  एक दिन
और मैं इन यादों  को  भूल  जाउंगी |