मंजिल की ओर
February 23, 2008 — Tanu Shreeबंद आँखों से खुले आसमाँ को देखा तो
उस आसमाँ में पंछी नहीं कुछ सपने दिखे
और साथ में थे कुछ अरमानो के बादल,
एक सपना कुछ अपना सा लगा
तो दिल किया आज ही जी लूँ उसे,
कल का तो पता नहीं , कल को किसने देखा है
जी भर कर बस आज ही जी लेती हूँ |
जीने की चाह दिल में लिए फिर
चल पड़ी मंजिल की डगर पर
पूरा करना है वो सपना
और बस ‘आज’ ही तो बाकी है |